Friday, 6 July 2012


1.) तेरी यादों से जो मेरी आँखों की बूंदें लावारिश हुई है
   उन्ही बूंदों से आज तेरे शहर में थोड़ी बारिश हुई है !

2.)  इश्क कि राहों पे कुछ दूर चले तो कुछ और दूर चलने कि तलब लगी, 
   मुआ ये मोहव्वत, चाय होता तो पी के तलब मिटा लेता !

3.) काश बारिशों संग मोहब्बत भी बरसती, 
  दुनिया में मैं अकेला आशिक तो ना होता !

4.) मैदान-ए-इश्क में खड़े है हम भी तुम भी,
     देखना ये है कौन क़त्ल होता है किससे !

5.) दिल्लगी के दायरे से बाहर निकल दीपांशु... 
   इश्क कि मंजिल मगरूर है पर दूर नहीं !!

5 comments:

  1. दीपांशु, बहुत अच्छा लिखा है!!!!

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  2. बहुत सुन्दर...

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  3. वाह....
    काश बारिशों संग मोहब्बत भी बरसती,
    दुनिया में मैं अकेला आशिक तो ना होता !

    4.) मैदान-ए-इश्क में खड़े है हम भी तुम भी,
    देखना ये है कौन क़त्ल होता है किससे !
    आपके पास ख्यालों की बड़ी पोटली है शायद..
    बहुत खूब...

    अनु

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  4. ekdum garda kar diya ..........jiyo ...

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