1.) तेरी यादों से जो मेरी आँखों की बूंदें लावारिश हुई है
उन्ही बूंदों से आज तेरे शहर में थोड़ी बारिश हुई है !
उन्ही बूंदों से आज तेरे शहर में थोड़ी बारिश हुई है !
2.) इश्क कि राहों पे कुछ दूर चले तो कुछ और दूर चलने कि तलब लगी,
मुआ ये मोहव्वत, चाय होता तो पी के तलब मिटा लेता !
3.) काश बारिशों संग मोहब्बत भी बरसती,
दुनिया में मैं अकेला आशिक तो ना होता !
4.) मैदान-ए-इश्क में खड़े है हम भी तुम भी,
देखना ये है कौन क़त्ल होता है किससे !
5.) दिल्लगी के दायरे से बाहर निकल दीपांशु...
इश्क कि मंजिल मगरूर है पर दूर नहीं !!
दीपांशु, बहुत अच्छा लिखा है!!!!
ReplyDeleteबहुत सुन्दर रचना!
ReplyDeleteबहुत सुन्दर...
ReplyDeleteवाह....
ReplyDeleteकाश बारिशों संग मोहब्बत भी बरसती,
दुनिया में मैं अकेला आशिक तो ना होता !
4.) मैदान-ए-इश्क में खड़े है हम भी तुम भी,
देखना ये है कौन क़त्ल होता है किससे !
आपके पास ख्यालों की बड़ी पोटली है शायद..
बहुत खूब...
अनु
ekdum garda kar diya ..........jiyo ...
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