21.) तेरी याद की क्या कहूँ...
जूते का फीता भी कसता हूँ तो तुझे वाहों में कसना याद आता है !
22.) बरसातों में सुवह कि शिद्दत देखो,
सुरज आता भी नहीं और सुवह हो जाती है ।
23.) मैं शायर नहीं
तू मेरी शायरी नहीं,
पर तमन्ना बहुत है कुछ तेरे जैसा हीं लिख दूं ।
24.) इश्क जब भी दरबाजा खटखटाता है
मुआ दिल कितना भी जख्मी है दौड़ा चला जाता है !
25.) कभी वो मेरी कवीता थी और मैं उसका कवि...
दो साल हुए ब्रेकअप को अब मैं शायर हू और नई शायरी है ढूंढ ली !
वाह .. क्या उड़ान है ख्यालों की ... लाजवाब ...
ReplyDeleteधन्यवाद बहुत बहुत....:)
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