Wednesday, 25 July 2012



21.) तेरी याद की क्या कहूँ...
        जूते का फीता भी कसता हूँ तो तुझे वाहों में कसना याद आता है !


22.) बरसातों में सुवह कि शिद्दत देखो,
        सुरज आता भी नहीं और सुवह हो जाती है ।


23.) मैं शायर नहीं
        तू मेरी शायरी नहीं,
        पर तमन्ना बहुत है कुछ तेरे जैसा हीं लिख दूं ।


24.) इश्क जब भी दरबाजा खटखटाता है
       मुआ दिल कितना भी जख्मी है दौड़ा चला जाता है !


25.) कभी वो मेरी कवीता थी और मैं उसका कवि...
       दो साल हुए ब्रेकअप को अब मैं शायर हू और नई शायरी है ढूंढ ली !

2 comments:

  1. वाह .. क्या उड़ान है ख्यालों की ... लाजवाब ...

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    1. धन्यवाद बहुत बहुत....:)

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